What is 1786 act in Hindi

नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है, 1786 act के गवर्नर जनरल और सेनापति के पद को मिलाकर एक कर दिया गया।

कॉर्नवॉलिस चाहता था की जब वह गवर्नर जनरल बनकर जाए तो सारी शक्ति उसके हाथों में हो क्यूंकी वह जानता था कि वारेन हेस्टिंग्स के साथ जो कार्यकारिणी परिषद भेजी गयी थी।

वह हमेशा उसके काम में दखल दिया करती थी इसी कारण विशेष परिस्थितियों में निर्णय लेने का अधिकार कॉर्नवॉलिस को दे दिया गया।

इस एक्ट को हम लार्ड कॉर्नवॉलिस का एक्ट भी कह सकते है क्यूंकि यह एक्ट लार्ड कॉर्नवॉलिस की शर्तों का एक्ट था।

इस एक्ट में ब्रिटिश गवर्नमेंट ने लार्ड कॉर्नवॉलिस की हर बात मानी थी क्यूंकी लार्ड कॉर्नवॉलिस बेसक एक योग्य व्यक्ति था और अभी पिट्स का इंडिया एक्ट आये हुए भी दो साल ही बीतें थे।

फिर इतनी शीघ्र कोई नया कानून भारत भेजने की क्या आवश्कयकता पड़ी इंग्लैंड सरकार ने पिट्स इंडिया एक्ट को भारत भेज तो दिया था।

मगर उसे लागू करवाने के लिए एक योग्य आदमी चाहिए था इसलिए ब्रिटिश गवर्नमेंट ने उसकी सारी शर्तें मानने के लिए बाध्य थी और लार्ड कॉर्नवॉलिस ब्रिटिश सरकार की उम्मीदों पर बिलकुल खरा उतरा।

उसने बहुत जल्द ही ईस्ट इंडिया कंपनी को अपने नियंत्रण में ले लिया और वही से भारत में कॉर्नवॉलिस के द्वारा किये गए सुधारों का सिलसिला सुरु हो गया।

1784 के पिट्स एक्ट को भारत में मजबूती और दृंढ़ता के साथ लागू करवाने का श्रेय भी कॉर्नवालिस को ही जाता है।

1786 act लार्ड कॉर्नवॉलिस के द्वारा किये गए प्रमुख सुधार / कार्य 

  1. स्थाई बंदोबस्त
  2. प्रशासनिक सुधार 
  3. व्यापारिक सुधार 
  4. कृषि सम्बंधित सुधार  

स्थाई बंदोबस्त

स्थाई बंदोबस्त को ‘’इस्तमरारी व्यववस्था’’ के नाम से भी जाना जाता था स्थाई बंदोबस्त द्वारा कॉर्नवालिस ने एक ऐसी व्यववस्था को जनम दे दिया।

जो ब्रिटिश गवर्नमेंट के लिए बहुत हितकर साबित हुई अंग्रेजो का उद्द्शेय भारत में ब्रिटिश शासन को मजबूती देना था और वह काम कॉर्नवॉलिस ने कर दिखाया कॉर्नवॉलिस ने इस व्यवस्था में भू-राजस्व की दर को निश्चित कर दिया।

भू-राजस्व की दर भूमि पर किसानो के द्वारा पैदा की जाने वाली कोई भी फसल या अन्य वस्तु पर लिया जाने वाला कर होता था।

जो किसान अपनी उपज का 8/9 ब्रिटिश सरकार को 1/9 जमींदारों को दिया करते थे क्यूंकि ज़मींदार उस समय बहुत शक्तिशाली हुआ करते थे।

और इस व्यवस्था से अंग्रेजो को बहुत फायदा मिला और ज़मीदार वर्ग भी खूब फलाफूला  यह बंदोबस्त 1790 में शुरू किया गया और 1793 में इसे निश्चित कर दिया गया।

और यह बंदोबस्त भारत की आज़ादी तक भी बहुत से भारतीय छेत्रों में चलता रहा है।

प्रशासनिक सुधार

कॉर्नवॉलिस ने सबसे पहले कंपनी में जितने अयोग्य कर्मचारी हुआ करते थे उन्हें बर्खास्त कर उनके स्थान पर योग्य कर्मचारी या अधिकारियों की नियुक्ति की कंपनी के कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए।

की यदि कोई कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़ा जाता है तो वह सजा का पात्र होगा इसी कारण उनकी सैलरी को बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया और उनके लिए पेंशन की व्यवस्था कर दी गयी।

कॉर्नवॉलिस जितने भी ऊँचे अधिकारी रैंक के पद होते थे उन पर अंग्रेजों की ही नियुक्तियां करता था उसका मानना था कि भारतीय लोग उन पदों के लायक ना थे।

कॉर्नवॉलिस ने भारत में बहुत से स्थानों पर जिला स्तर की अदालतों का निर्माण करवाया और वहां पर जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति की उसने पुलिस विभाग को सुदढ़ृ बनने की कोशिश की।

उसने प्रत्येक 32 किलोमीटर की दुरी पर एक थाने का निर्माण करवाया और वहां पर 1 दरोगा और 10-15 अन्य पुलिसकर्मियों की तैनाती की कॉर्नवॉलिस ने उस समय बहुत से कानूनों का अध्ययन कर एक कानून तैयार किया था।

जिसे कॉर्नवॉलिस कोड के नाम से जाना जाता है इसमें व्यापर सम्बन्धी, न्याय सम्बन्धी, पुलिस सम्बन्धी और राजस्व सम्बन्धी कानून थे और भी कॉर्नवॉलिस ने प्रशासन सम्बन्धी महत्वपूर्ण कार्य किये जो निम्नलिखित हैं।

1.कॉर्नवॉलिस को सिविल सेवा का जनक माना जाता है।

२. कॉर्नवॉलिस ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पद का सृजन किया।

व्यापारिक सुधार

कॉर्नवॉलिस ने व्यापर सुधार में सबसे पहला काम ये किया की व्यापारियों और किसानो के बीच जो दलाल हुआ करते थे उनको हटाया और व्यापारी अब सीधे किसानो से माल खरीद सकते थे।

और व्यापारिक बोर्ड सदस्यों की संख्या को घटाकर 11 से 5 कर दिया और निजी व्यापार पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगा दिया।

क्यूंकि कंपनी के कंगाल हो जाने का कारण और इसके कर्मचारियों या अधिकारियों  के मालामाल हो जाने का कारण यही था।

क्यूंकि कंपनी के निजी व्यापारी भारत से अच्छा और किफायती माल खरीदकर यूरोप के बाजार में बेचते थे और कंपनी को घटिया माल उपलब्ध करते थे।

जिस कारण कंपनी का माल यूरोपीय बाज़ारों में बिक नहीं पाता था और कंपनी नुक्सान में जा रही थी।

लार्ड कॉर्नवॉलि  स के सुधारों का परिणाम 

कॉर्नवॉलिस भारत आने से पहले बहुत सारी नाकामियां देख चुका था और हाल ही में उसे एक और नाकामी हाथ लगी थी।

वह अमेरिका के यॉर्कटोंन से युद्ध लड़कर आया था और जिसमे उसे जॉर्ज वाशिगंटन ने बुरी तरह पराजित किया था।

क्योंकि इंग्लैंड ने सिर्फ भारत को ही अपना ग़ुलाम नहीं बनाया था बल्कि दुनिया के बहुत से देश उसके उपनिवेश थे और इंग्लैंड ने अमेरिका के भी बहुत से प्रांतों पर अपना अधिकार किया हुआ था।

और कॉर्नवॉलिस उस समय अमेरिका में ब्रिटेन देश का प्रतिनिधि था और अमेरिका में अपने प्रांतों को बचने के लिए लड़ रहा था।

परन्तु वह वाशिंगटन के सामने ज़्यादा देर न टिक सका और मैदान छोड़ भागा इसी कारण वह भारत आने से पहले सम्पूर्ण बागडोर अपने हाथों में लेना चाहता था ताकि जो अमेरिका में हुआ वह भारत में न हो।

किसानों का शोषड

अंग्रेजो ने भारत में जितनी व्यवस्थायें लागू की उनसे भारत के किसान या निम्न वर्ग के लोगो का बहुत शोषड़ हुआ और स्थाई बंदोबस्त जैसी व्यवस्था ने तो किसान वर्ग की रीढ़ की हड्डी ही तोड़ दी।

उनकी दिन रात की मेहनत की बाबजूद भी उन्हे दो वक़्त की रोटी के लिए भी जूझना पड़ता था हालत भुखमरी के बन चुके थे क्योंकि इतना भारी लगान तो अंग्रेज वसूल  बचाकुचा ज़मीदार को देना पड़ता था।

इस व्यवस्था ने किसान की हालत बेहद खराब कर दी थी।

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