Types of force in Hindi

types of force in Hindi

बल force किसे कहते हे :

किसी वस्तु पर लगाया गया बल उस वस्तु के द्रव्यमान तथा उसमें उत्पन्न तरण के गुणनफल के समानुपाती होता है।                             F=MA

बल का एस आई पद्धति में मात्रक न्यूटन होता है तथा सीजीएस पद्धति में डायन होता है।

प्रबलता का क्रम गुरुत्वाकर्षण बल <विद्युत चुंबकीय <बल स्थिर विद्युत बल< नाभिकीय बल।किसी पिंड पर अनेकों बलों का परिणामी शून्य होने पर संतुलित बल कहलाता है।

types of force in Hindi

घर्षण बल frictional force

जो बल गति का विरोध करता है वह घर्षण बल कहलाता हैघर्षण बल सतह की प्रकृति पर निर्भर करता है उसके क्षेत्रफल पर नहीं।

चलने के लिए घर्षण आवश्यक है इसी कारण वाहनों के टायर खुर्द रे बनाए जाते हैं घर्षण ना होने पर ब्रेक कार्य नहीं करेंगे।

घर्षण बल frictional force का क्रम :गैस <द्रव <ठोस

घर्षण को कम करने के लिए स्नेहक (तेल मोबिल ग्रीश) का उपयोग किया जाता है ।

ठोस स्नेहक का कार्य -ग्रेफाइट 

स्थैतिक घर्षण बल static frictional force

किसी सतह पर रखी वस्तु पर बल लगाने पर भी ना खिसके तो सतह और वस्तु के बीच लगने वाले बल को स्थैतिक घर्षण बल कहते हैं स्थैतिक घर्षण बल का मान सबसे अधिक होता है।

सर्पी घर्षण बल सतह पर सरकने वाली वस्तु और सतह के बीच लगने वाला बल सर्पी घर्षण बल कहलाता है।

लोटनिक घर्षण बल

सतह पर लुढ़क ने वाली वस्तु और सतह के बीच लगने वाला बल लोटनिक घर्षण बल कहलाता हैलोटनिक घर्षण बल का मान सबसे कम होता है।

बल आघूर्ण

अपने अक्ष के परित: घूमते पिंड पर लगने वाला बल तथा अक्ष से बल की क्रिया रेखा की लंबवत दूरी का गुणनफल बल आघूर्ण कहलाता है अक्ष से दूरी बढ़ने पर कम बल लगाना होता है जैसे दरवाजों के हैंडल, नल के हत्ते, कुमार के चौक ,में हत्था दूर लगाया जाता है।

अधिक बल आघूर्ण के लिए ही ट्रैक्टर के पिछले पहिए बड़े बनाए जाते हैं संतुलन की स्थिति में बामाबर्ती आघूर्ण का योग दक्षिणावर्ती आघूर्ण के बराबर होता हैसरल मशीनी या उत्तोलक बल आघूर्ण के सिद्धांत पर कार्य करती हैं इनके द्वारा कम बल लगाकर अधिक भार उठाया जा सकता है उत्तोलक घी, गरारी ,आनत तल, स्क्रु ,जैक ,पहिया ,पेंच ,नट आदि सरल मशीनें है।

अभिकेंद्र बल centre force क्या होता हे : 

एक समान वृत्तीय गति में केंद्र की ओर लगने वाला बल अभिकेंद्र बल कहलाता है
अभिकेंद्र बल    F= mv^2                                                                    r

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  • अभिकेंद्र बल घर्षण बल प्रत्यास्थ तनाव बल गुरुत्वीय बल विद्युत चुंबकीय बल आदि से प्राप्त होता है।
  • डोरी में अभिकेंद्र बल तनाव बल से मिलता है यदि डोरी टूट जाए या हाथ से छूट जाए तो अभिकेंद्र बल समाप्त हो जाने के कारण पत्थर वृत्तीय गति को छोड़कर वृत्त की स्पर्श रेखा की दिशा में रेखीय गति करने लगता है
  1. कीचड़ में साइकिल चलाने या चप्पलों से कीचड़ आवश्यक अभिकेंद्र बल ना मिलने के कारण ही कीचड उपर फेंक दी जाती है इसे रोकने के लिए मडगार्ड लगाए जाते हैं
  2. किसी सवारी के मोड़ पर मुड़ते समय सड़क और टायर के बीच घर्षण से अभिकेंद्र बल प्राप्त होता है यदि टायर की से हो या सड़क चिकनी हो तो आवश्यक घर्षण बल ना मिलने के कारण वह फिसल जाता है
  3. अतः ऐसी स्थिति में साइकिल सवार अपने मार्ग की त्रिज्या बढ़ाकर या तिरछा होकर या धीमी गति करके सवार आवश्यक अभिकेंद्र बल प्राप्त करता है
  4. इसी इसी कारण सड़क या रेल की पटरिया मोड की तरफ झुकी हुई बनाई जाती हैं पहाड़ी सड़के भी डालू बनाई जाती हैं जिससे वाहन स्वयं एक तरफ झुक जाए और अब शक अभिकेंद्र बल प्राप्त कर ले इसी प्रकार हवाई जहाज उड़ते समय या मुड़ते समय अपने को एक तरफ झुका लेता है पक्षी भी उड़ते समय एक तरफ झुक जाते हैं
  5. परमाणु में इलेक्ट्रॉन वृत्तीय कक्षाओं में नाभि के और इलेक्ट्रॉन के मध्य लगने वाले आकर्षण बल से प्राप्त अभिकेंद्र बल के कारण घूमते हैं
  6. जब कोई आवेशित कण किसी चुंबकीय क्षेत्र में लंबवत गति करता है तो उस पर कार्य करने वाला लॉरेंज बल करण की गति की दिशा में और चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दोनों के लंबवत कार्य करने के कारण कण की गति वृत्ताकार हो जाती है अतः इसमें अभिकेंद्र बल लॉरेंज बल से प्राप्त होता है
  7. ऊर्ध्वाधर पानी से भरी बाल्टी घुमाने पर बाल्टी उल्टी हो जाने पर पानी नीचे नहीं करता क्योंकि बाल्टी उल्टी होने पर रस्सी का तनाव और पानी का भार दोनों मिलकर अभिकेंद्र बल प्रदान करते हैं जिससे पानी का भार अभिकेंद्र बल प्रदान करने में ब्याह हो जाता है


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