क्यों आया श्रीलंका में आर्थिक संकट [reason] sri lanka crisis in hindi

sri lanka crisis in hindi

आजादी के बाद श्रीलंका कई बार मुसीबतों से घिरा 2009, 2013, 2016 इन सभी सालों में श्रीलंका में  ऋण का संकट देखने को मिला। इसी के साथ-साथ वहां की जीडीपी दर भी लगातार गिरती गई लेकिन हाल ही में श्रीलंका में जो स्थिति खड़ी हो गई है वह अब तक की सबसे भयानक स्थिति है। इतनी भयानक है कि वहां के राष्ट्रपति को अब आपातकाल लगाने की नौबत तक आ गई है। किसी भी देश की व्यवस्था जब डगमगाती है तो उसके पीछे कोई एक कारण नहीं होता उसके पीछे कई ऐसे कारण होते हैं जिसकी वजह से किसी देश का हश्र श्रीलंका की तरह होता है। श्रीलंका की वर्तमान स्थिति के पीछे भी कई कारण है।

2019 में हुए ईस्टर बम विस्फोट और कोरोना

21 अप्रैल 2019 को श्रीलंका में कोलंबो में कई गिरजा घरों में बम विस्फोट हुए थे जिसके कारण  लगभग 300 लोग मारे गए थे। इस घटना के बाद श्रीलंका में पर्यटन का क्षेत्र बिल्कुल कमजोर पड़ गया है। लोग वहां जाने से कतराते हैं और जब श्रीलंका जैसे देश की एक महत्वपूर्ण आय पर्यटन पर टिकी हो तो इस घटना का असर बहुत ही नकारात्मक होता है और इसी का परिणाम है कि श्रीलंका में विदेशी मुद्रा का बहुत अभाव हो गया है।

कोविड-19 की स्थिति को भी दूसरा कारण माना जा सकता है जिसके कारण पर्यटन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। श्रीलंका की सकल घरेलू आय में 10 फीसदी हिस्सा पर्यटन उद्योग का रहा है और आज स्थिति यह है श्रीलंका एक बहुत बड़े विदेशी कर्ज के नीचे  दबा हुआ है।

जैविक खेती के परिणाम

कई बार जल्दबाजी में फैसला करना मुश्किलों को  आमंत्रित करने के जैसा होता है जो नीतियां खूबसूरत दिखाई देती हैं वे व्यावहारिक स्तर पर इतनी लाभकारी साबित नहीं होती है।श्रीलंका ने रातों-रात यह निश्चित किया कि वह अब 100% जैविक खेती वाला देश बनेगा और इसलिए उसने हाल ही में उर्वरक आयातों पर पूरी तरीके से रोक लगा दी इसका परिणाम यह हुआ  खाद्य उत्पादन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। खाद्य कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई और विदेशी मुद्रा पूरी तरीके से घट गई।

 राजनीतिक गलती

श्रीलंका के राष्ट्रपति ने सत्ता में आने से पहले कई वादे किये, परंतु बाद में यह वादे अविवेकपूर्ण सिद्ध हुए। और हद तो तब पार हो गई जब सरकार ने वर्तमान संकट से निपटने के लिए गलत तरीके अपनाने शुरू कर दिये। किसी का कारण था कि जनता में अब आक्रोश पैदा हो गया और उन्होंने राष्ट्रपति भवन के सामने ही विद्रोह करना शुरू कर दिया, जिसके परिणाम स्वरूप राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को आपातकाल लगाना पड़ा।

खाने पीने की कमी के कारण आम जनता सड़कों पर उतर आई हैं और सरकार के खिलाफ उग्र नारेबाजी भी कर रहे हैं और यह विद्रोह अब हिंसा का रूप भी लेने लगा है। ऐसे में राष्ट्रपति का आपातकाल घोषित करना उनके अनुसार एक अच्छा विकल्प था। उन्हें इसके अतिरिक्त कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आ रहा था। इसी के साथ साथ श्रीलंका के कई मंत्रियों ने अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है इस तरीके से वहां राजनीतिक संकट भी खड़ा हो चुका है।

मूलभूत चीजों का अभाव

श्रीलंका में मूलभूत जरूरत की चीज़े धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर है। पेट्रोल और डीजल खत्म हो चुका है और देश के पास इतने पैसे भी नहीं है कि वह तेल खरीद सके। डीजल की किल्लत के कारण फैक्टरी बंद हो जाती हैं। स्तिथि इतनी खराब है कि अब स्ट्रीट लाइट भी बंद हो चुकी हैं। डॉक्टर ऑपरेशन नहीं कर पा रहे हैं। इसी के साथ साथ खाने पीने की चीजों का भी बहुत अभाव है। लोग दंगे पर उतर आए हैं और खाने पीने के लिए तरस रहे हैं।

चीन की नजदीकी श्रीलंका पर भारी

एक महत्वपूर्ण कारण हम सभी देखते हैं कि चीन ने श्रीलंका में बहुत निवेश बढ़ाया है और इतिहास कहता है कि चीन ने जिस जिस देश में अपने निवेश को बढ़ावा दिया है वहाँ राजनीतिक और आर्थिक स्थिति का पतन बहुत ही शीघ्रता से हुआ है। इसके महत्वपूर्ण उदाहरण श्रीलंका और पाकिस्तान है।

भारत द्वारा दी जा रही सहायता

क्योंकि भारत श्री लंका का पड़ोसी देश है और वह काफी मायनों में श्रीलंका से उन्नत भी है। ऐसे में श्रीलंका का या विश्व के अन्य देशों का भारत से उम्मीद करना लाजिमी हो जाता है परंतु महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि भारत किस हद तक श्रीलंका की मदद कर सकता है?

 2022 की शुरुआत में भी भारत ने 1.4 बिलियन डॉलर से अधिक की राहत राशि प्रदान की थी अभी श्रीलंका सरकार फिर से भारत की ओर देख रही है।

इसी के साथ-साथ भारत में श्रीलंका की मदद के लिए  अल्पकालिक रियायती ऋण के तौर पर एक बिलियन डॉलर भी दिए हैं।

आपदा को अवसर बनाना

 कई विद्वानों का तर्क है कि भारत को श्रीलंका के संकट के समय अपनी रणनीति बनानी चाहिए और इस आपदा को अवसर में बदलना चाहिए। उसे श्रीलंका के साथ कई  समझौते करने चाहिए। ताकि इन दोनों देशों का विकास अच्छी गति से हो सके। अभी यह भारत पर निर्भर करता है कि उसकी आगे की सोच क्या होगी।

एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठता है कि श्रीलंका की इस स्थिति का भारत पर क्या असर होगा? क्योंकि श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में चीन का असर हर दिन बड़ा है इसकी वजह से भारत को सतर्क रहने की जरूरत है। यदि श्रीलंका में चीन का प्रभाव यूँही चलता रहा तो यह सामरिक दृष्टिकोण से भारत के लिए अच्छा नहीं होगा।

वैसे तो श्रीलंका भारत के लिए कोई ज्यादा महत्व नहीं रखता लेकिन भू राजनीतिक वजह से यह द्वीप काफी अहम है। यह कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं जिसके वजह से श्रीलंका आज खबरों में है। वहां के हालात बहुत खराब हो चुके हैं ।ऐसे में जरूरी हो जाता है कि सरकार बैठकर सोचे और कुछ ऐसे फैसले ले जिससे इस स्थिति से निपटा जा सके क्योंकि आपातकाल जैसा तरीका प्रयोग करने से स्थिति सुधरेगी नहीं बल्कि स्थिति और अधिक भयानक होगी। सरकार को अपने हित से ऊपर उठकर जनता के हित के बारे में सोचना होगा और सबसे पहले जनता का पेट भरना होगा।

दोबारा शादी करने जा रही टीना डाबी जाने कोन है प्रदीप गवांडे

Leave a Comment