kisan bill kya hai in Hindi 2020 India

Kisan bill kya hai

तीन विधेयक पारित किये गए है जो इस प्रकार है-

  1. आवश्यक वस्तु (सशोधन ) विधेयक , 2020
  2. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण ) विधेयक , 2020
  3. कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वाशन और कृषि सेवा पर करार विधेयक , 2020

आवश्यक वस्तु (सशोधन ) विधेयक , 2020

The Essential Commodities (Amendment) Bill को पढ़ने से पहले हम चलते है आवश्यक वस्तु (सशोधन ) विधेयक , 1955 में इस विधेयक के अनुसार जो बड़े बड़े दुकानदार होते है उन्हें आवश्यक चीजों के भंडारण से रोकता है अगर किसी चीज की बाजार में कमी है तो उसकी कीमत बढ़ जाती है इस पर केंद्र सरकार उस चीज के भंडारण पर रोक लगा देती है और दुकानदार को एक निश्चित quantity पर ही वह उपलब्ध कराई जाती है ।

आवश्यकता वस्तु (संशोधन) विधेयक १९९५ में संशोधन करके लोकसभा ने 15 सितम्बर २०२० को आवश्यक वस्तु (सशोधन ) विधेयक , 2020 को मंजूरी दे दी कृषि क्षेत्र में सुधार और किसानो की आय बढ़ने के उद्देश्य से लोकसभा ने आवश्यक वस्तु (सशोधन) विधेयक को पास कर दिया।

इस बिल में खाद्य पदार्थो अनाज , दाल , और प्याज को नियंत्रण मुक्त करने का प्रावधान है साफ साफ शब्दों में कहे तो असीमित मात्रता में खाद्य पदार्थो को दुकानदार जमा कर के रख सकता है।

कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण ) विधेयक , 2020

The farmers Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) के अनुसार किसान अपनी फसलों को राज्य सरकार की मंडियां होती है जिन्हे APMC (Agreculture produce marcket committee)कहा जाता है उनको बेचता है अगर किसान किसी और राज्य में अपनी फसल को बेचना चाहता है तो उसे टैक्स देना होता है ।

अब किसान को अपनी फसल बैचने पर कोई टैक्स नहीं देना होगा किसान को अपनी फसल की अच्छी कीमत मिल जाएगी और जिस किसान कि फसल बहुत अच्छी हुई है उसे उस फसल का अच्छा दाम मिल जाएगा।

ऐसे किसान जहां किसी फसल की खेती काम हुई है वो फसल भी उसे कम दामों में मिल जाएगी ।

कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वाशन और कृषि सेवा पर करार विधेयक , 2020

The farmers (Empowerment and Protection) Agreement on price Assurance and farm services Bill, 2020 के अनुसार किसान अपनी फसल की कीमत को पहले ही एक मूल्य पर निर्धारित कर लेगा जो भी कॉन्ट्रैक्टर, होलसेलर होगा उससे किसान पहले है अपनी फसल का मूल्य तय कर लेगा ।

इससे किसान को अपनी फसल का अच्छा दाम मिल जाएगा और उसका जो खर्चा आता है जैसे ट्रेक्टर से अपनी फसलों को ले जाना का खर्च और भी ऐसे खर्चे होते हैं उन से भी बच जाएगा ।

किसान फार्म बिल का बिरोध क्यों कर रहे है

इसको पढ़ने से पहले हमे जानना होगा की What is APMC

Agriculture produce market committee

जब देश आजाद हुआ था तब किसान को अपनी फसल बेचने के लिए बड़े बड़े जमीदारो के पास अपनी फैसले बेचनी पढ़ती थी क्युकी भारत में moneylander और traders का भारत की agreculture सेक्टर पर बहुत बढ़ा कब्ज़ा था किसानो के पास कोई जरिया नहीं था की वह अपनी फसलों को बाजारों में बेच सके।

जिससे किआनो हालत बहुत ही ख़राब चलते थे इन पर कर्ज रहता था।

भारत सरकार ने इस परेशानी से बचने के लिए एक तरीका निकाला और वो तरीका था APMC (Agreculture produce marcket committee)

भारत सरकार ने कहा की हम state lable पर कुछ प्रमुख क्षेत्र बना देते है जिन्हे बाजार क्षेत्र कहा जायेगा और इन बाजार में moneylander और traders कोई भी चीज को ऐसे खरीद और बेच नहीं सकता उसके लिए उन्हें भारत सरकार की अनुमति लेनी होगी यानि license की जरुरत पड़ेगी।

भारत सरकार ने कहा की किसानो को उनकी फसलों के लिए minimum support price दिया जायेगा। एक ऐसा दाम जिस पर किसान अपनी फसलों को बेच सकता है खरीदने बाला उससे कम दाम नहीं लगा सकता।

MSP (MINIMUM SUPPORT PRICE)

MSP in hindi – न्यूनतम समर्थन मूल्य

Msp वह न्यूनतम मूल्य है जिस पर सरकारी एजेंसी जैसे food corporation of india किसानो से उनकी फसलों को खरीदती है वह मूल्य msp कहलाता है।

MSP फसल की उगाई से पहले निर्धारित की जाती है मान लिया कोई फसल 1400 रुपए कुंटल है तो किसान अपनी फसल को इतने मूल्य मिलेगा ही।

अब ये msp निर्धारित कौन करता है ये निर्धारित करता है CACP (commission for agriculture cost and price).

सरकार २५ फसलों के लिए msp को निर्धारित करती है सबसे पहले msp गेंहू की फसल पर निर्धारित किया गया था।

किसान क्यों बिरोध कर रहे है इस विधेयक का

भारत सरकार बोल रही है की अब किसान अपनी फसल को कही भी बेचने के लिए स्वतंत्र है लेकिन भारत का सिर्फ ६ प्रतिशत किसान ही अपनी फसल को APMC में msp पर बेचता है बाकि के किसान अपनी फसल को दूसरे राज्यों में और होलसेलर को बेचते है।

बात करते है बिहार की जहाँ APMC कानून को २००६ में ही हटा दिया गया था यहाँ सीधे व्यापारी किसानो से फसल की खरीदारी करते है अब बिहार में तो किसान का फायदा होना चाहिए।

साल २०१५-२०१६ में नाबार्ड की रिसर्च के अनुसार बिहार एक किसान की आय ७१७५ रुपए महीना थी पंजाब में किसान की आय २३१३३ है और हरियाणा में एक किसान की आय १८४९६ थी अब बिहार में APMC लागु नहीं है लेकिन हरियाणा और पंजाब में लागु है।

अब बात करते है मक्के की मक्के की MSP १८५० प्रति कुंटल है मध्य प्रदेश में समय पर मक्के की खरीद न करने की वजह से किसानो को मक्के को व्यापारियों को बेचना पढ़ा किसानो ने मक्के को व्यापारियों को ८०० से १००० रुपए प्रति कुंटल बेचा।

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