जाने 28 मार्च को भारत बंद का क्या कारण है?

देश में होते हड़ताल, आंदोलन, विद्रोह, नारेबाजी या बंद का ऐलान जैसी गतिविधियां न केवल भारत को एक लोकतांत्रिक देश बताती है बल्कि निरंतर इसके लोकतंत्र को मजबूत भी करती हैं।

सरकार की आर्थिक नीतियों का विरोध करते हुए मजदूर वर्ग, बैंक कर्मचारी, किसान आदि कुछ वर्गों ने 28 और 29 मार्च को भारत बंद का ऐलान किया है। इसलिए आज और कल देश की कई गतिविधियां बाधित रहेंगी।

जाने 28 मार्च को भारत बंद का क्या कारण है?

केंद्रीय ट्रेड संघों के एक संयुक्त फोरम ने इस भारत बंद को नेतृत्व प्रदान किया । इस संयुक्त फोरम में हिंद मजदूर सभा, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन, इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, सेल्फ इंप्लायड वूमेन एसोसिएशन, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, ट्रेड यूनिय को-आरडिनेशन सेंटर, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स, लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस शामिल हैं। इन सभी वर्गों का मानना है कि सरकार की हाल ही की नीतियों में इन पर नकारात्मक असर डाला है तथा यह उन नीतियों का विरोध करते हैं।

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क्या है मांगे? 

इन संगठनों ने श्रम संहिता को खत्म करने की मांग की है तथा यह चाहते हैं कि देश के किसी भी क्षेत्र में निजीकरण न हो, परिसंपत्तियों की बिक्री के लिए बने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन को निरस्त किया जाए तथा मनरेगा ( MNREGA) मजदूरी को बढ़ाने और कांट्रैक्ट वर्करों के नियमितीकरण जैसी कई मांगे उठाई हैं।

इसी के साथ-साथ इनकी कुछ अन्य मांगे भी हैं जैसे कि लोन की वसूली के लिए बैंक तंत्र को मजबूत किया जाए और ब्याज की दर भी बढ़ाई जाए, पुरानी चल रही पेंशन योजना को फिर से लागू किया जाए।  इस हड़ताल में सरकारी निजी सहकारी बैंक के कर्मचारी भी शामिल होंगे।

हाल ही में एक बैठक में ईपीएफ पर मिलने वाले ब्याज में कटौती, पेट्रोल, एलपीजी, केरोसिन, सीएनजी की कीमतों में वृद्धि पर चर्चा हुई। यहां पर यह भी बताया गया कि सरकार की नीतियों की वजह से ही महंगाई निरंतर बढ़ रही है।

भारत बंद का असर

इस हड़ताल का असर उन वर्गों तक ही सीमित नहीं है जो इसका हिस्सा हैं  बल्कि हम आम जनता पर भी इसका असर होगा। आज और कल बैंक का कमकाज बाधित हो सकता है। इसका असर परिवहन व्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।

इस हड़ताल को समर्थन देकर विपक्ष ने भी सरकार को घेरने की योजना बनाई है। भारत में ऐसी गतिविधियां न केवल इन वर्गों के बीच में एकता दर्शाती हैं बल्कि इनकी जागरूकता को भी बताती हैं। इस हड़ताल का सरकार पर क्या असर होगा? यह  आगे आने वाले दिन बताएंगे।

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