भारत की पंचवर्षीय योजनाए FIVE YEAR PLAN IN INDIA FOR 2020

भारत की पंचवर्षीय योजनाए FIVE YEAR PLANS IN INDIA

प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956)

यह five year plan हेराड डामर के द्वारा बनाई गई इसलिए इसे डोमर समृद्धि योजना कहा जाता है हेराड डामर ने इस five year plan में कृषि सिंचाई को प्राथमिकता दी है

इस योजना में सिंचाई की समस्या से निपटने के लिए तीन बहुउद्देशीय परियोजनाएं बनाई गई 

  1. दामोदर घाटी परियोजना ( बंगाल )
  2. भांखड़ा नागल परियोजना ( पंजाब )
  3. हीराकुंड परियोजना ( उड़ीसा )

जब भारत आजाद हुआ तब भारत की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी तब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए एक कार्यक्रम चलाया जिसका नाम सामुदायिक विकास कार्यक्रम था

द्वितीय पंचवर्षीय योजना ( 1956 1961 )

यह five year plan पी सी महालनोबिस द्वारा बनाई गई इसलिए इसे पी सी महालनोबिस मॉडल कहते हैं इस योजना ने भारी उद्योगों को प्राथमिकता दी आधारभूत उद्योगों का विकास करने के लिए स्टील के तीन प्लांट स्थापित किए गए 

  1. दुर्गापुर (बंगाल): जो ब्रिटेन की सहायता से स्थापित किया गया
  2. भिलाई (छत्तीसगढ़): जो रूस की सहायता से स्थापित किया गया
  3. राउरकेला (उड़ीसा): जो जर्मनी की सहायता से स्थापित किया गया

1959 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राजनीतिक विकेंद्रीकरण की शुरुआत की उन्होंने राजस्थान के नागौर जिले में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत की। 

तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-1966)

यह five year plan असफल रही इस योजना का उद्देश्य आत्मनिर्भरता था

1964 में इस योजना के तहत बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना की गई 

1964 में ही UTI और IDBI बैंक की स्थापना हुई 1965 में FCI की स्थापना की गई

तृतीय योजना के फेल होने के कारण

  1. 1962 में भारत और चीन का युद्ध हुआ 
  2. 1964 में पंडित जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु 
  3. 1965 में भारत पाकिस्तान का युद्ध 
  4. 1966 में अकाल पढ़ना

योजना अवकाश

जब भारत में आर्थिक स्थिति और बुरी हो गई तब भारत सरकार के पास पैसे की कमी हो गई जिससे पंचवर्षीय योजना का बनना मुश्किल था भारत सरकार ने five year plan की बजाय 1 साल की योजना का निश्चय लिया लेकिन उससे कुछ फायदा नहीं हुआ 1966 से 1969, 3 वर्ष तक योजना ले गई इस योजना में कृषि तथा उद्योगों को समान प्राथमिकता दी गई। 

OLD INDIA

चतुर्थ पंचवर्षीय योजना (1969-1974)

इस योजना का उद्देश्य स्थिरता के साथ विकास था यह योजना डी आर गाडगिल के द्वारा बनाई गई थी 1969 जुलाई में इस five year plan के तहत 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया यह राष्ट्रीयकरण इंदिरा गांधी द्वारा किया गया उस समय इंदिरा गांधी भारत की प्राइम मिनिस्टर थी इंदिरा गांधी ने 1974 में परमाणु परीक्षण किया इस परीक्षण का नाम स्माइलिंग बुद्धा था यह परीक्षण राजस्थान के पोखरण जिले में हुआ 1974 में परिवार नियोजन कार्यक्रम बुलाया गया क्योंकि 1961 से 1971 जनसंख्या में वृद्धि हुई जिसके तहत यह कार्यक्रम लाया गया

पांचवी पंचवर्षीय योजना (1974-1978)

इस योजना का उद्देश्य गरीबी उन्मूलन के साथ आत्मनिर्भरता था यह योजना 5 वर्ष के बजाय 4 वर्ष चली 1974 में इस योजना के दौरान न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम चलाया गया 2 अक्टूबर 1975 को एक बैंक की स्थापना हुई जिसका नाम क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक था

अनवरत योजना (1978-1980) 

यह योजना 1978-1983 तक के लिए जनता पार्टी द्वारा चलाई गई थी मोरारजी देसाई के नेतृत्व में यह योजना चलाई गई 1980 में मोरारजी देसाई की सरकार चली जाने के कारण यह योजना बंद कर दी गई 1980 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार आई उस सरकार ने 1980 में इस योजना को बंद कर दिया 

छठी पंचवर्षीय योजना (1980-1985)

इस योजना का उद्देश्य था रोजगार का सृजन तथा गरीबी निवारण था इसके लिए भारत सरकार ने कुछ योजनाएं चलाई

  1. IRDP integrated rural development programme
  2. RLEGP  rural landless employment guarantee programme
  3. TRYSE training for rular youth for self employee
  4. NREP National rural employment programme

1980 में छह अन्य बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया

सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-1990)

इस योजना का उद्देश्य दीर्घकालीन विकास था इस योजना के दौरान इंदिरा आवास योजना चलाई गई नेहरू रोजगार कार्यक्रम इस five year plan के दौरान चलाया गया 1988 में SEBI की स्थापना की गई सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया

भारत में शेयर बाजार को नियंत्रित करने के लिए यह संस्था बनाई गई सातवीं पंचवर्षीय योजना को प्रोफ़ेसर राजकृष्ण द्वारा हिंदू वृद्धि दर योजना कहा गया। 

योजना अवकाश (1990-1992)

भारत समाजवादी अर्थव्यवस्था की तरफ पूरा झुक चुका था भारत सरकार ने लगभग 156 क्षेत्र कि कंपनी को अपने अधीन कर लिया था 156 क्षेत्रों में भारत उत्पादन कर रहा था सरकारी क्षेत्र में बढ़ोतरी होने के कारण भारत की अर्थव्यवस्था क्षण होती जा रही थी समाजवादी अर्थव्यवस्था हमने रूस से ली थी 1991 में रूस आर्थिक संकट के कारण रूस का विभाजन हो गया जिसका असर भारत पर भी हुआ आर्थिक स्थिति के गिरते भारत सरकार ने पंचवर्षीय योजना की स्थान पर 1 वर्ष योजना अपनाई 1990 से 1995 तक 2 योजनाएं लाई गई

आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-1997)

यह उदारीकरण के बाद पहली five year plan है इस योजना के दौरान भारत 1 जनवरी 1995 को WTO WORLD TRADE ORGANIZATION का सदस्य बना 1993 में प्रधानमंत्री रोजगार योजना चलाई गई

नोबी पंचवर्षीय योजना 1997-2002

इसका उद्देश्य सामाजिक न्याय और समानता के साथ विकास था 1998 में अटल बिहारी बाजपेई द्वारा दूसरा परमाणु परीक्षण किया गया जिसका नाम शक्ति था यह परीक्षण दो चरणों में 5 परीक्षण किए गए इसी दौरान इस योजना के दौरान स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार कार्यक्रम चलाया गया

दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-2007)

यह योजना अब तक की सबसे सफल योजना थी इसमें 2007 तक गरीबी का स्तर 26 परसेंट से घटकर 21 परसेंट तक रखा गय

2007 साक्षरता को 75 परसेंट तक बढ़ाने पर जोर दिया गया 

2003 तक 100 प्रतिशत बच्चे स्कूल में होंगे 

2007 तक मातृत्व मृत्यु दर 2/प्रति हजार रखा गया 

2007 शिशु मृत्यु दर 45% रखा गया

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना 11th five year plan (2007-2012)

इस 11th five year plan का उद्देश्य तीव्र और अधिक समावेशी विकास था 11th योजना, GDP वृद्धि दर का आंकड़ा 9 % रखा गया लेकिन यह प्राप्त नहीं किया जा सका क्योंकि अर्थव्यवस्था का तीव्र गति से ना बढ़ना इसका मुख्य कारण था इस लक्ष्य का प्राप्त प्रतिशत 7. 9 प्रतिशत है

11th योजना कृषि क्षेत्र की विकास दर का लक्ष्य 4% रखा गया लेकिन 3.2% ही प्राप्त हो सका

12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017)

इस five year plan का उद्देश्य तीव्र संपोषणीय और अधिक समावेशी विकास था

संपोषणीय मतलब जितना लेना उतना देना जैसे हम जितने प्रकृति से ले रहे हैं उतना ही उसे वापस करें अगर हम एक पेड़ काट रहे हैं तो एक पेड़ लगाएं भी

इसका लक्ष्य जीडीपी वृद्धि दर रखा गया इसमें जीडीपी वृद्धि दर 8% की की वृद्धि से बड़े, कृषि वृद्धि दर 4% रखी गई 

उद्योग क्षेत्र की वृद्धि दर 9.6% रखी गई 

सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 10% रखी गई इसमें बचत दर 36.2% रखी गई 

निवेश दर 38.7% सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धनता को घटाकर 10% पर लाने का लक्ष्य रखा गया गैर कृषि कार्य में 50 मिलियन रोजगार का श्रजन करेंगे इसके साथ विनिर्माण वृद्धि में क्षेत्र में 10% की वृद्धि हो

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