त्वचा dermis क्या होती हे और ये कितने प्रकार की होती है

त्वचा dermis क्या होती हे और ये कितने  प्रकार की होती है

त्वचाका अध्ययन  dermatology

त्वचा Dermis हमारे शरीर का सबसे बड़ा बाहरी भाग है और हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग है जो 
संपूर्ण शरीर को घेरे रखता है dermis हमारे शरीर का सबसे बड़ा संवेदी 
अंग sensory organ भी है।
त्वचा dermis मैं दो परते होती हैं
  1. आंतरिक त्वचा Dermis  ( सजीव परत Animate layer) 
  2. बाह्य त्वचा Epidermis ( निर्जीव  परत Inanimate layer ) 
पहले हम बाहय त्वचा के बारे में पढ़ेंगे – what is epidermis

बाह्य त्वचा Epidermis ( निर्जीव  परत Inanimate layer ) :

यह त्वचा खुरदरी होती है तथा समय के साथ झडती और आती रहती है ठंडे मौसम
में रूसी  के रूप में बाहर आती है यह त्वचा हमारे हाथ और पैर के तलवों में सबसे 
ज्यादा होती है इस की सबसे पतली परत हमारी पलकों में पाई जाती हैं इनमें धमनी artery 
और शिरा vein नहीं पाया जाता इसलिए इनमें संवेदनाएं नहीं होती बाहय त्वचा outer dermis 
कैरोटीन carotene की बनी होती है कैरोटीन carotene एक प्रकार का प्रोटीन proteine होता है
हमारे बाल hairs और गैंडे की नाक पर सिंग कैरोटीन carotene का बना होता है। 
बाहय त्वचा Epidermis में तीन परत पाई जाती हैं
  1. एपीथिलियम परत Epithelium layer
  2. मध्य दानेदार परत Mid granular layer
  3. मालपिघियन परत Malpighian layer

एपीथिलियम परत Epithelium layer:

यह हमारे हाथों और तलवों में होती है यह सबसे बाहरी भाग है।

मध्य दानेदार परत Mid granular layer:

इस परत में बसा के छोटे-छोटे small बुलबुले होते हैं इसलिए इनको मध्य दानेदार परत कहते हैं
इसका कार्य त्वचा के अंदर जल water को बनाए रखना होता है यह परत layer जल रोधी 
होती है। 

मालपिघियन परत Malpighian layer:

मध्य दानेदार परत के ठीक नीचे एक परत layer होती है वह भी बसा की बनी होती है इसमें
मेलेलिन melanin पाया जाता है जो हमारी त्वचा को रंग प्रदान करता है यह एक रासायनिक पदार्थ है 
इसका निर्माण धूप द्वारा होता है सूर्य sun से आने वाली पराबैंगनी किरणें ultraviolet rays जब
त्वचा पर पड़ती हैं तो इसका निर्माण होता है मेलेनिन melanin के द्वारा त्वचा का color निर्धारित होता है। 
त्वचा dermis क्या होती हे और ये कितने  प्रकार की होती है

आंतरिक त्वचा  ( सजीव परत Animate layer) :

इसमें संवेदना होती है इसमें रोम ,प्रस्वेद ग्रंथियां ,तेल ग्रंथियां एवं तंत्रिका तंत्र पाया जाता है इसमें सुई 
चुभने पर एहसास होता है क्योंकि इसमें तंत्रिका तंत्र पाया जाता है। 
इसकी मुख्यतः तीन परत होती हैं
  1. अंकुरित परत Sprouting layer
  2. जालकीय परत Netted layer
  3. अधोत्वचा Hypodermis

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अंकुरित परत Sprouting layer:

अंकुरित परत sprouting layer में संवेदना की क्षमता होती है हमारे शरीर body में विभवांतर के
अंतर को मापती है इसी से होकर सूचना हमारे दिमाग mind तक जाती है। 

जालकीय परत Netted layer:

अंकुरित परत netted layer के ठीक नीचे होती है जालकीय परत में इलाास्टिन तथा कोलाजंतु तंतु 
होते हैं यह तंतु हमारे त्वचा dermis को लचीलापन प्रदान करते हैं। 

अधोत्वचा Hypodermis:

यह परत ऊष्मा रोधी होती है जो हमारे शरीर में तापमान temperature को रोके रखता है जिससे 
हमारे शरीर का तापमान बना रहता है जो 98.4 या 98.6 फारेनहाइट होता है। 

त्वचा के कार्य:

  1. त्वचा dermis हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग है इसलिए यह हमारे पूरे शरीर को सुरक्षा protection प्रदान करता है यह जीवाणु विषाणु धूल कण आदि से हमारे शरीर की रक्षा करता है। 
  2. शरीर के तापमान को बनाए रखता है। 
  3. त्वचा उत्सर्जी अंग है जब हमारे शरीर में का तापमान बढ़ता है तो स्वेद ग्रंथियों से होकर पसीना बाहर आता है पसीने के साथ नमक Nacl पोटेशियम क्लोराइड Kcl और यूरिया बाहर आता है इसलिए इसे शरीर का तीसरा गुर्दा भी कहते हैं। 

त्वचा के रूपांतरित रूप:

  1. बाल रोम
  2. नाखून
  3. स्तन ग्रंथियां
  4. गेंडे की सिंग
  5. स्वेद ग्रंथियां
  6. प्रस्वेद ग्रंथियां शरीर में इसकी संख्या 20 से 25 लाख
  7. तैलीय ग्रंथिय

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